Skip to content

दर्द का दिल पर मेरे पहरा हुआ…

दर्द का दिल पर मेरे पहरा हुआ,
निरंतर ज़ख्म फिर गहरा हुआ !

पी गये ख़ामोश रहकर ग़म सभी,
आँसुओं से तर-ब-तर चेहरा हुआ !

चमन सा घर मेरा खुशियों भरा,
क्या हुआ कैसे ये सहरा हुआ !

महकी हुई नफ़स में खुशबू तेरी,
याद आया वक्त वो गुज़रा हुआ !

यूं लगा जैसे घटायें छा गई हों,
जब तेरी जुल्फों का बिखरा हुआ !

निनाद कल-कल कर रहीं है नदी,
मौन सागर है मगर ठहरा हुआ !

झूठ और फरेब ही चलता यहां,
फक़त एक सत्य गूंगा बहरा हुआ !

दर्द सारा हमने अपना लिख दिया,
महेंद्र” कलाम अब मेरा पूरा हुआ !

__महेंद्र श्रीवास्तव

Published inग़ज़ल

Be First to Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *